Category Archives: Hindi Poem/ Stories

I was thinking to publish poems and stories written by me, but typing in Hindi was a big trouble. Then i came with a solution in terms of image. sharing with you all. thanks for hanging here.

जीवन

पूछा था न तुमने, सुनो फिर Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , , , , , , | Leave a comment

वो बहुत अमीर है

बड़े होते हैं सभी के!! पर उनमे से, सभी का एक दोस्त ऐसा होता है जो सबसे अमीर है, लेकिन कहीं बैठ कर, दोस्त यार अगर गपशप करते हुए चाय पी ले तो सौ रुपये का बिल देने के नाम पर नज़रे चुरा लेगा !! सबसे अच्छी बात यह है कि चाय में कमियाँ भी वही निकाल रहा होगा !! आपके हमारे ऐसे किसी दोस्त के लिए कुछ पंक्तियाँ !! Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , , | Leave a comment

“श्रृंगार”

“दिन भर तुम्हारा बाहर रहना, और मैं घर पर राह तकती तुम्हारी, झांकती कभी खिड़की से तो कभी जालियों से, कभी सुनती आवाजें, लगाती ध्यान उन पर, पहचानने के लिए, तुम्हारी आहट, के भाग आऊं भीतर, सुनकर ही दरवाजे की … Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , | Leave a comment

“कोटर”

रूई से उड़ते बादल, पेड़ों की झूमती डालियां,
अधखिली कोपलें, पल्लवित कुसुम,
होड़ में.स्वागतातुर,
इनके बीच मेरा घोंसला, झाँकती एक कोटर से,
देखती आज मैं भी, भोर होते हुए !! Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , | Leave a comment

“बादल “

मन ही तो है “मेरा”
बह रहा है तुम्हारे वेग से
कभी तुम मुझ से ओर मैं तुम सी
बरसते तुम भी, बरसती मैं भी !!

दीप्ति!! Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , | 2 Comments

वात्सल्य !!

आज फिर उमड़ते बादलों ने, याद दिला दी,  मेरे बचपन और तुम्हारी सहज कोशिशों की, एक चलचित्र सा, चल रहा था मेरी आँखों में!! ओस और कुहरे की परवाह न करते थे तुम, छोड़ देते थे मुझे सरसों के लहलहाते … Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , | 1 Comment

दलीलें

हम अब भी इसे प्यार कह रहे थे, दलील थी, कि कुछ साझा करने लगे थे, हम, हमारी भावनाएँ, या यूँ कहें, भावनाओं से उपजा प्रेम, जो महसूस कर रहे थे, हम, एक दूसरे के लिए, या फिर, जिंदगी अपनी … Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , | Leave a comment

बीजांकुर

“मैं नारी, सहज सी मूर्ति, किसी की साकार कल्पना, जिसने मुझे अंकुरित करते सोचा न था मेरा स्वरूप, तीव्र वेदना की चोट से, आहत होता गया, मेरा आकार, और उभर गई मैं, मूक बधिर, जो न कुछ कहती है, सुनकर भी … Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , , , , , | Leave a comment

“मेरी जीत की परिभाषा”

“यूं तो नहीं बाँध सकती, कुछ लफ्जों को, वाक्यों के बंधन में, जो परिभाषित करे जीत को | कभी गिर कर संभलना, किसी अबोध के लिए, तो कभी बार बार लड़ना, हर चुनौती की दीवार को ढहाकर, आगे बढ़ना, बस बढ़ते … Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , , | Leave a comment

प्रतिबिंब

रिया ने ही क्या, रिया के उम्रदराजो ने जीवन के उतार चढाव के बारे मे सुना ही था. माँ बाप ही ऐसा कवच होते हैं जो बच्चो को अहसास भी नही होने देते किसी भी बुरे वक़्त का. और यही … Continue reading

Posted in Hindi Poem/ Stories | Tagged , , , , , , , , , | Leave a comment