Tag Archives: hindi poetry

जीवन

पूछा था न तुमने, सुनो फिर Continue reading

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“श्रृंगार”

“दिन भर तुम्हारा बाहर रहना, और मैं घर पर राह तकती तुम्हारी, झांकती कभी खिड़की से तो कभी जालियों से, कभी सुनती आवाजें, लगाती ध्यान उन पर, पहचानने के लिए, तुम्हारी आहट, के भाग आऊं भीतर, सुनकर ही दरवाजे की … Continue reading

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“कोटर”

रूई से उड़ते बादल, पेड़ों की झूमती डालियां,
अधखिली कोपलें, पल्लवित कुसुम,
होड़ में.स्वागतातुर,
इनके बीच मेरा घोंसला, झाँकती एक कोटर से,
देखती आज मैं भी, भोर होते हुए !! Continue reading

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“बादल “

मन ही तो है “मेरा”
बह रहा है तुम्हारे वेग से
कभी तुम मुझ से ओर मैं तुम सी
बरसते तुम भी, बरसती मैं भी !!

दीप्ति!! Continue reading

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वात्सल्य !!

आज फिर उमड़ते बादलों ने, याद दिला दी,  मेरे बचपन और तुम्हारी सहज कोशिशों की, एक चलचित्र सा, चल रहा था मेरी आँखों में!! ओस और कुहरे की परवाह न करते थे तुम, छोड़ देते थे मुझे सरसों के लहलहाते … Continue reading

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दलीलें

हम अब भी इसे प्यार कह रहे थे, दलील थी, कि कुछ साझा करने लगे थे, हम, हमारी भावनाएँ, या यूँ कहें, भावनाओं से उपजा प्रेम, जो महसूस कर रहे थे, हम, एक दूसरे के लिए, या फिर, जिंदगी अपनी … Continue reading

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बीजांकुर

“मैं नारी, सहज सी मूर्ति, किसी की साकार कल्पना, जिसने मुझे अंकुरित करते सोचा न था मेरा स्वरूप, तीव्र वेदना की चोट से, आहत होता गया, मेरा आकार, और उभर गई मैं, मूक बधिर, जो न कुछ कहती है, सुनकर भी … Continue reading

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